SwarTune14 Logo

SwarTune14

Bhakti Sanctuary
मंत्र एवं स्तोत्र

शिव तांडव स्तोत्रम्: लंकापति रावण कृत महाकाव्य का अर्थ, ध्वनि कंपन और आध्यात्मिक शक्ति

✍️ SwarTune14 Devotional Desk 📅 Sep 30, 2026 ⏱️ 8 min read
शिव तांडव स्तोत्रम्: लंकापति रावण कृत महाकाव्य का अर्थ, ध्वनि कंपन और आध्यात्मिक शक्ति

कैलाश पर्वत पर रचा गया अद्वितीय स्तोत्र

सनातन वांग्मय में भगवान आशुतोष शिव की स्तुति में अनेक ग्रंथ लिखे गए, परंतु शिव तांडव स्तोत्रम् की तुलना किसी अन्य स्तोत्र से नहीं की जा सकती। जब लंकापति रावण ने अपने बाहुबल के मद में आकर कैलाश पर्वत को उठाने का प्रयास किया, तब भगवान शिव ने केवल अपने पैर के अंगूठे से पर्वत को दबा दिया। पर्वत के नीचे हाथ दब जाने से रावण पीड़ा से विलाप करने लगा और उसने उसी क्षण आशुतोष भगवान की कृपा पाने के लिए इस तीव्र, छंदबद्ध स्तोत्र की रचना की।

"जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम्।
डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम्॥"

नाद ब्रह्म और संस्कृत छंद का चमत्कार

शिव तांडव स्तोत्र में पंचचामर छंद का प्रयोग हुआ है। इसकी ध्वनि डमरू के 'डम-डम' की लयबद्ध गति से मेल खाती है। जब कोई साधक इसका स्पष्ट उच्चारण करता है:

शिव तांडव स्तोत्र के आध्यात्मिक संकेत

इस स्तोत्र में रावण ने शिव के जिस रूप का वर्णन किया है, वह प्रकृति के संतुलन का प्रतीक है। एक ओर उनके मस्तक पर अग्नि की ज्वाला प्रज्वलित है, दूसरी ओर शीतल भागीरथी गंगा की धारा प्रवाहित है। एक ओर भयानक कालसर्प गले में लिपटे हैं, दूसरी ओर अमृतमयी चंद्रमा उनके भाल को सुशोभित कर रहा है। यह इस बात का प्रमाण है कि विरोधी प्रवृत्तियों के बीच संतुलन बनाए रखना ही 'शिवत्व' है।

श्रवण और पाठ का श्रेष्ठ समय

प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय) और सोमवार को शिव तांडव स्तोत्र सुनना अथवा पाठ करना परम कल्याणकारी माना गया है। विशेषकर सावन मास और महाशिवरात्रि पर यह स्तोत्र जीवन के समस्त बंधनों और दरिद्रता को समाप्त करने वाला है।

🙏 नित्य भक्ति व शांति का अनुभव करें

SwarTune14 पर भगवान राम, शिव, कृष्ण, हनुमान और माता रानी के 1000+ दिव्य भजन, मंत्र और आरतियाँ बिना किसी रुकावट के सुनें।

▶ अभी निःशुल्क भजन सुनें